हे वंशीधर श्याम।





 April 16, 2018
आन बसो मेरे नयन, हे वंशीधर श्याम।
नैना बरसत हर घड़ी, लेकर तेरा नाम।। १

माँझी बनकर श्याम जी, भव से पार उतार।
मैं हूँ तेरी सांवरे, सुन लो हृदय पुकार।। २

मोर मुकुट तन काछनी, घुँघराले से केश।
गिरधर मीरा को मिले, धर नटवर का वेष।। ३

ढूंढ़ रही मैं सांवरा,धर कर जोगन वेश।
ढूंढ़-ढूंढ़ कर युग गया, श्वेत हो गये केश।। ४

-लक्ष्मी सिंह

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