मूर्ख दिवस

मूर्ख बनाकर नित यहाँ, ठगते नेता चोर ।
मूर्ख दिवस पर क्या भला, कहें निशा को भोर।।

मुर्ख बनाकर छिन रहें ,नेता मुँह का कौर ।
मूर्ख दिवस फिर क्या भला, महा मूर्ख का दौर ।।

-लक्ष्मी सिंह

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